हिन्दू राष्ट्र के संदर्भ में अपना मतप्रदर्शन करना हिन्दुओं का संवैधानिक अधिकार ही है ! – श्री. रमेश शिंदे, हिन्दू जनजागृति समिति

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में चल रहे उत्तर एवं पूर्व भारत हिन्दू राष्ट्र हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन का तीसरा दिन

वाराणसी : भारत के संविधान की प्रस्तावना में ही भारतीय नागरिकों को धर्म एवं उपासना की स्वतंत्रता प्रदान की गई है ! धारा २५ के अंतर्गत भारतीय नागरिकों को धर्म का प्रचार करने का एवं धारा १९ में अपना मतप्रदर्शन करने का अधिकार है ! अतः हिन्दू समाज ने भारत में हिन्दू राष्ट्र के संदर्भ में अपना मत प्रदर्शित किया, तो वह संपूर्णरूप से संवैधानिक है ! हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने ऐसा मार्गदर्शन किया। यहां के आशापुर क्षेत्र के स्मृति लॉन में चल रहे उत्तर एवं पूर्व भारत हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन के तिसरे दिन ‘हिन्दू राष्ट्र स्थापना के मुलभूत विचार’ इस विषय पर वे बोल रहे थे।

श्री. रमेश शिंदे

इस समय विविध हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिन्दुओं के साथ हो रहे अत्याचार, हिन्दूसंगठन एवं हिन्दू राष्ट्र का महत्त्व इन विषयों पर अपने जाज्वल्य विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर कोलकाता की शास्त्र धर्मप्रचार सभा के अध्यक्ष एवं नियतकालिक ‘द ट्रूथ’ के संपादक पू. (डॉ.) शिवनारायण सेनद्वारा अधिवेशन के उपलक्ष्य में भेजे गए आशीर्वचन का वाचन भी किया गया।

श्री. रमेश शिंदे ने आगे कहा, ‘‘प्रभु श्रीराम ने हमे मातृभूमि का महत्त्व ध्यान में लाकर दिया। लंका पर विजय प्राप्त करने के पश्चात जब लक्ष्मण ने श्रीराम को बताया कि, हमने सोने की लंका जीती है, तो पुनः अयोध्या जाने की क्या आवश्यकता है ?, तब श्रीराम ने उत्तर दिया कि, सोने की लंका की अपेक्षा मुझे मेरी मातृभूमि अधिक प्रिय है ! इस दृष्टि से देखा जाए, तो हिन्दू राष्ट्र का विचार किसी राजनीतिक दल अथवा किसी संगठन का विचार नहीं, अपितु वह एक प्राचीन, उदात्त एवं आदर्श शासनतंत्र है ! जो दिशाओं से बनता है, वह देश होता है ! राष्ट्र हमारी भावना, हमारे विचार, हमारे पूर्वज एवं हमारी संस्कृति से बनता है ! इंडिया, तो केवल एक देश हो सकता है; परंतु हिन्दू राष्ट्र तो भारत ही होगा !

देश की नागरिकता खरीदी जा सकती है; किंतु राष्ट्रनिष्ठा नहीं। वह तो अंदर से आनी चाहिए ! राष्ट्र के लिए हमें अकेले नहीं, अपितु दूसरों को भी प्रोत्साहित कर कुछ करना पडेगा। संपूर्ण विश्व में ऐसा एक भी देश नहीं है, जहां का शासनतंत्र अल्पसंख्यकों की इच्छा और आकांक्षाओं के अनुसार चलता हो; परंतु भारत में यह स्थिति है ! अतः हमें इसमें परिवर्तन लाना पडेगा ! ‘एक भारत एक कानून’ के नियम को ध्यान में लेते हुए भारत में रहना होगा, तो उसके लिए भारत के कानून को मानना पडेगा !’’

नेपाल में हिन्दुत्व को बचाना आवश्यक ! – श्री. अजय सिंह, वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन

श्री. अजय सिंह

‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दू संगठन की आवश्यकता और चुनौतियां, साथ ही वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशनद्वारा किया गया हिन्दूसंगठन का कार्य’ इन विषयों पर बोलते हुए वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री. अजय सिंह ने कहा, ‘‘नेपाल में माओवादी और ईसाई हिन्दुओं के साथ अत्याचार कर रहे हैं ! वहां हिन्दुओं की ९२ प्रतिशत की जनसंख्या अब घट कर ८० प्रतिशत रह गई है ! इसका अध्ययन करने पर यह ध्यान में आता है कि, नेपाल में हिन्दुओं का बडी मात्रा में धर्मपरिवर्तन किया जा रहा है। इससे यदि हमें बचना हो, तो हिन्दुत्व को बचाना पडेगा !’’

अपने परिचय के उद्योगपतियों को हिन्दू राष्ट्र स्थापना कार्य के साथ जोडें ! – पू. प्रदीप खेमका, उद्योगपति परिषद

पू. प्रदीप खेमका

‘हिन्दू राष्ट्र स्थापना हेतु उद्योगपतियों का संगठन’ इस विषय पर मार्गदर्शन करते हुए उद्योगपति परिषद के पू. प्रदीप खेमकाजी ने कहा, ‘‘१-२ लोग संगठन का कार्य नहीं कर सकते, अपितु उसमें सभी का सहभाग आवश्यक होता है ! अधिवक्ताओं का संगठन बनाते समय अधिवक्ताओं ने जिस प्रकार अपना योगदान देकर विविध अधिवक्ताओं को इस कार्य के साथ जोडा, उसी प्रकार से अब हमें उद्योगपतियों के संगठन के कार्य में सहभागी होना पडेगा ! इसलिए अपने परिचयवाले हिन्दुत्वनिष्ठों को इस कार्य में जोडें और उसी माध्यम से उनका संगठन खडा करें ! हिन्दू जनजागृति समिति के कार्यकर्ताओं के पास उद्योगपतियों के संगठन हेतु आवश्यक प्रसारसामग्री उपलब्ध है। इस कार्य को प्राप्त आपका अमूल्य सहभाग हिन्दू राष्ट्र स्थापना की दिशा में प्रेरणादायी सिद्ध होगा !’’

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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