ईसाई मिशनरी बडा घोटाला : झारखंड में ₹ २.६ लाख की जमीन ₹ ४.७६ करोड में . . .

रोम की संस्था ने उडाईं सीएनटी-एसपीटी एक्ट की धज्जियां – भाजपा

इस जमीन की खरीद के दस्तावेजों में तीन अलग-अलग पते लिखे हुए हैं जो कि, ब्रदर सिरिल लकडा से संबंधित हैं ! एक दस्तावेज में नामकुम का पता है तो दूसरे में गुमला का, तीसरे में पुरुलिया रोड, राँची का !

झारखंड में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने एक मिशनरी संस्था पर CNT-SPT कानून का दुरुपयोग करते हुए जमीन की खरीद-फरोख्त का गंभीर आरोप लगाया है ! सोमवार (२२ जुलाई २०१९) को पार्टी प्रदेश मुख्यालय में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात की जानकारी दी कि नामकुम अंचल के खाता नंबर-३ और १४२ के प्लॉट नंबर १७०, १७१, १७२, १७३, १७४, १७६, १७७ के कुल ४.२३ एकड की जमीन की खरीद-बिक्री में जमकर गडबडी हुई है !

एक मिशनरी संस्था ने उडाई CNT-SPT कानून की धज्जियाँ – भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव

प्रतुल शाहदेव ने बताया कि, इस जमीन को साल २००४-०५ में पहले ब्रदर सिरिल लकडा ने कोडियों के भाव खरीदा ! उस समय इस जमीन की क़ीमत ₹ २.६ लाख थी और इसे बेचते समय इसकी क़ीमत ₹ ४.७६ करोड हो गई ! इतना ही नहीं, इस जमीन की खरीद और बिक्री के दस्तावेजों में तीन अलग-अलग पते लिखे हुए हैं जो कि ब्रदर सिरिल लकडा से संबंधित हैं ! एक दस्तावेज में नामकुम का पता है तो दूसरे में गुमला का। वहीं, तीसरे में पुरुलिया रोड, राँची का पता लिखा हुआ है !

ब्रदर सिरिल लकडा ने व्यक्तिगत तौर पर खरीदी जमीन को गेल इंडिया लिमिटेड को बेचा
जमीन के इस दस्तावेज में गुमला का पता लिखा है

खबर के अनुसार, यह मिशनरी संस्था रोम की मोनफोर्ट ब्रदर्स ऑफ़ सेंट गेब्रियल है। ग्रेबियल सोसायटी शैक्षणिक संस्था के रूप में निबंधित है और उसका मुख्यालय रोम में है। भाजपा प्रवक्ता का कहना है कि, इस संस्था ने अवैध तरीके से जमीन की खरीद और उसकी बिक्री में १८३ गुना तक कमाई की है ! दरअसल, ब्रदर सिरिल लकडा ने इस ४.३ एकड जमीन को ₹ ४.७६ करोड में गेल इंडिया लिमिडेट को बेच दिया था और इससे १३ साल में इस जमीन से १८३ गुना लाभ कमाया गया !

इस जमीन की रजिस्ट्री ब्रदर सिरिल लकडा ने अपने नाम कराई थी

प्रतुल शाहदेव के अनुसार, ब्रदर सिरिल लडका ने जब यह जमीन खरीदी थी तो वो व्यक्तिगत तौर पर खरीदी थी, लेकिन उसी जमीन को बेचते समय मिशनरी सामने आ गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मिशनरी संस्था में फादर, ब्रदर और सिस्टर को जमीन रखने का अधिकार प्राप्त नहीं है, जबकि इस जमीन की रजिस्ट्री ब्रदर सिरिल लकडा ने अपने नाम कराई थी !

इसी संदर्भ में प्रतुल का कहना है कि, सोसायटी को जमीन खरीदने और बेचने का कोई अधिकार नहीं था, लेकिन जिस तरह से खरीद-फ़रोख्त का यह प्रकरण सामने आया है, उससे पता चलता है कि, सूबे में बडे पैमाने पर ईसाई संस्थाएँ गलत कार्यों में लिप्त हैं ! इसकी शिकायत उचित फोरम में जरूर की जाएगी !

स्त्रोत : ऑप इंडिया एवं न्युज १८

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