श्री सिद्धिविनायक मंदिर की संपत्ति लूटनेवाले पूर्व न्यासियों के विरोध में अपराध प्रविष्ट कर उनसे मंदिर संपत्ति की आपूर्ति की जाए !

  • श्री सिद्धिविनायक मंदिर न्यास भ्रष्टाचारविरोधी कृति समिति

  • श्रद्धालुओंद्वारा आस्थापूर्वक समर्पित धन की श्री सिद्धिविनायक मंदिर के पूर्व न्यासियोंद्वारा लूट !

भ्रष्टाचारविरोधी कृति समिति को मंदिर संपत्ति का अपहार हुआ है यह बात ध्यान में आती है; परंतु पूरी यंत्रणा हाथ में होते हुए भी सरकार के ध्यान में यह बात क्यों नहीं आती ?

पत्रकार परिषद में बाईं ओर से बजरंग दल के श्री. शिवकुमार पांडे, श्री सिद्धीविनायक मंदिर ट्रस्ट भ्रष्टाचारविरोधी कृति समिति के समन्वयक श्री. अजय संभूस, भ्रष्टाचारविरोधी कृति समिति के क़ानूनी सलाहकार अधिवक्ता श्री. वीरेंद्र इचलकरंजीकर, समिति के सदस्य डॉ. अमित थडाणी एवं सनातन संस्था के श्री. शंभू गवारे

मुंबई : प्रभादेवी का श्री सिद्धिविनायक मंदिर समस्त गणेशभक्तों की आस्था का केंद्र है ! केवल महाराष्ट्र से ही नहीं, अपितु पूरे देश से गणेशभक्त इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं । वर्ष २०१६ में श्री सिद्धिविनायक मंदिर न्यास के किए गए परीक्षण से कुछ चौंकानेवाली बातें सामने आयी हैं । इसमें १ जनवरी २०१५ से ३१ अगस्त २०१६ की अवधि में इस न्यास के न्यासियों ने जलयुक्त शिवार योजना (एक शासकीय योजना) तथा चिकित्सा उपकरण उपलब्ध करा देने के संदर्भ में सहायता, अध्ययन करने के नाम पर ८ लाख ११ सहस्र २५९ रुपए साथ ही वाहक के अतिरिक्त भत्ते के रूप में ४ लाख ८० सहस्र रुपए, इस प्रकार से कुल मिला कर १२ लाख ९१ सहस्र २९१ रुपए का व्यय किया गया है । इसमें लॉजिंग, खानपान आदि के लिए किए गए व्ययों का भी अंतर्भाव है !

आश्‍चर्य की बात यह है कि, श्री सिद्धिविनायक मंदिर का कानून न्यासियों को इस तरह के यात्राव्यय की अनुमति ही नहीं देता, उसके लिए शासन से अनुमति लेनी पडती है !

अतः बिना शासन की अनुमति से मंदिर न्यासियोंद्वारा अभ्यास भ्रमण के लिए किया गया व्यय नियमबाह्य है ! इसके अतिरिक्त जलयुक्त शिवार के लिए सहायता राशि राज्य शासन को ही दे दी गई हैं, तो उसके लिए अभ्यास भ्रमण करने की क्या आवश्यकता थी ? यह प्रकरण गंभीर है; इसलिए इस प्रकरण में संबंधित न्यासियों के विरोध में धोखाधडी तथा अनियमितताओं के अपराध प्रविष्ट किए जाएं !

श्री सिद्धिविनायक मंदिर न्यास भ्रष्टाचारविरोधी कृति समिति के क़ानूनी सलाहकार तथा हिन्दू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता श्री. वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने यह मांग की । श्री सिद्धिविनायक मंदिर के पूर्व न्यासियोंद्वारा मंदिर संपत्ति की, की गई लूट के विरोध में आवाज उठाने के लिए गणेशभक्तों की ओर से समिति की स्थापना की गई । इस समिति की ओर से २० फरवरी को ली गई पत्रकार परिषद में श्री सिद्धिविनायक मंदिर न्यास भ्रष्टाचारविरोधी कृति समिति के समन्वयक श्री. अजय संभूस, समिति के सदस्य तथा देवस्थान भ्रष्टाचार के अभ्यासी डॉ. अमित थडानी, बजरंग दल के श्री. शिवकुमार पांडे, सनातन संस्था के प्रवक्ता के श्री. शंभू गवारे उपस्थित थे ।

अधिवक्ता श्री. वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने आगे कहा,

१. वर्ष २०१५ में न्यास के तात्कालिन न्यासी प्रवीण नाईक ने मिरज (जिला सांगली) के सिद्धिविनायक कर्करोग चिकित्सालय के अवलोकन के लिए २७ से २९ जनवरी की अवधि में ३ दिनों का भ्रमण किया; परंतु उनकेद्वारा इस भ्रमण का दिया गया देयक गोवा राज्य के एक होटल का है । तो क्या मुंबई से मिरज तक की यात्रा में गोवा आता है ? तो यह प्रश्‍न उपस्थित होता है कि क्या वे इस अभ्यास भ्रमण के नामपर गोवा में मौज करने के लिए गए थे ?

२. नाईक की भांति और एक न्यासी हरिश सणस ने भी इसी अवधि में बिना अनुमति से ही किराए का वाहन लेकर मुंबई से मिरज का भ्रमण किया । इन दोनों ने एक ही अवधि में एक ही मार्ग से यात्रा की, तो सणसद्वारा लिए गए किराए के वाहन से ही इन दोनों ने एकत्रित यात्रा क्यों नहीं की ? मंदिर में भक्तोंद्वारा समर्पित किए गए अर्पित धन का अपव्यय करना तो मंदिर की लूट और शासन से की गई धोखाधडी है, साथ ही आस्थापूर्वक धन अर्पण करनेवाले श्रद्धालुओं से किया गया विश्‍वासघात है !

३. २ से ४ डिसेंबर २०१३ की अवधि में तात्कालिन न्यासियों ने तिरुपति देवस्थान का अवलोकन करने के लिए विमान से यात्रा की । इन न्यासियों ने विमान की महंगी यात्रा कर मंदिर का अर्पित धन क्यों उडाया ? इस भ्रमण यात्रा के लिए न्यास ने शासन से अनुमति क्यों नहीं ली ? परीक्षण ब्यौरा तो अत्यंत हास्यास्पद है ! इसके लिए इतना व्यय करने की आवश्यकता ही नहीं थी, यह स्पष्ट होता है ! मंदिर संपत्ति की लूट करनेवाले पूर्व न्यासियों से इस धन की आपूर्ति की जानी चाहिए !

४. इस प्रकरण में शासन सजग नहीं था; परंतु अगस्त २०१६ में मंदिर न्यास के निरीक्षण ब्यौरे में न्यास को दी गई सूचनाएं न्यासियोंद्वारा की गई अनियमितिताओं को उजागर करनेवाली हैं ! इसमें स्पष्टता के साथ यह टीप्पणी की गई है कि, ‘शासनद्वारा दिए गए विशेष आदेश के बिना न्यास की धनराशि से किसी भी प्रकार की यात्राओं का आयोजन नहीं किया जाना चाहिए ! अपवादजनक स्थिति में यात्रा की आवश्यकता अनिवार्य होने पर भी संबंधित विभाग की ओर से स्वीकृति लेनी चाहिए, वाहनों का उपयोग तथा वाहनचालक के अतिरिक्त भत्ते पर नियंत्रण रखा जाना चाहिए !’

अतः मुख्यमंत्री इस कार्योत्तर व्यय के लिए स्वीकृति न दें साथ ही भ्रष्टाचार को सहमति न दें तथा शासन की अनुमति के बिना की गई इस मंदिर संपत्ति की लूट के प्रकरण में संबंधित न्यासियों के विरोध में अपराध प्रविष्ट कर इस धन की उनसे आपूर्ति की जाए । मुख्यमंत्री से ऐसी मांग कर रहें हैं !

करोडों रुपयों की धनराशि राजनीतिक स्वार्थ के कारण अनेक संस्थाओं को दिए जाने की घटना उजागर ! – डॉ. अमित थडानी

पूर्व न्यायाधीश टिपणीस समिति के ब्यौरे में निहित उदाहरणों को प्रस्तुत करते हुए मंदिर सरकारीकरण के दुष्परिणामों के अभ्यासी डॉ. अमित थडानी ने कहा, ‘‘श्री सिद्धिविनायक न्यास की ओर से जो चंदा दिया जाता था, उसके लिए शासन का विधि तथा न्याय विभाग स्वीकृति देता था । उस समय गोविंदराव आदिक राज्य के विधि एवं न्याय मंत्री, तो दिलीपराव सोपल इसी विभाग के राज्यमंत्री थे । उनके न्यास को क्रमशः ५० लाख और २० लाख रुपए का चंदा दिया गया है । आपातकालिन धनराशि की सहायता का कारण देकर राजनीतिक स्वार्थ के लिए अनेक संस्थाओं को आर्थिक सहायता दी गई है । उसके कारण ही पूर्व न्यायाधीश टिपणीस समिति ने न्यास की कार्यपद्धति पर फटकार लगाई है; परंतु अभीतक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जो कि अत्यंत गंभीर है !’’

भक्तोंद्वारा समर्पित धन की लूट करनेवाले न्यासियोंद्वारा, श्रद्धालुओं की आस्था पर ही आघात ! – श्री. शिवकुमार पांडे, बजरंग दल

मंदिर के पूर्व न्यासियोंद्वारा किये गए अपहारों को देखते हुए ‘बाड़ ही खाए खेत’, इस मुहावरे की प्रचीती आती है ! भक्तोंद्वारा समर्पित धन की लूट कर इन न्यासियों ने श्रद्धालुओं की आस्था पर ही आघात किया है । घर के स्वामीद्वारा ही घर को लूटने की यह घटना किसी चोर के द्वारा की गई चोरी से भी अधिक भयंकर है !’’

शासनद्वारा इन भ्रष्टाचारियों के विरोध में कार्रवाई नहीं की गई, तो तीव्रता से आंदोलन चलाएंगे ! – श्री. अजय संभूस, समन्वयक, श्री सिद्धिविनायक मंदिर न्यास भ्रष्टाचारविरोधी कृति समिति

मंदिर संपत्ति की लूट करना महापाप है ! वक्रतुंड श्री गणेश वाममार्गी महापापियों को दंडित तो अवश्य करेंगे ही; परंतु मंदिरों का सरकारीकरण किए जाने से हो रही लूट को रोकना शासन का भी दायित्व बनता है ! हम शासन से यह मांग करते हैं कि इन भ्रष्टाचारियों के विरोध में कार्रवाई करें ! शासनद्वारा इन भ्रष्टाचारियों के विरोध में कार्रवाई नहीं की गई और लूटे गए धन की आपूर्ति नहीं की गई, तो हम तीव्रता के साथ आंदोलन चलाएंगे !

सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. शंभू गवारे ने कहा कि, ‘हम भी इसका विरोध कर रहें हैं !’

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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