अज्ञान का आवरण दूर कर धर्मज्ञान का आनंद देनेवाला धर्मसंवाद !

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संचारबंदी के समय सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा संयुक्त रूप से आरंभ की गई ऑनलाइन सत्संग शृंखला का एक महत्वपूर्ण सत्संग है 'धर्मसंवाद' ! अज्ञान का आवरण दूर कर धर्मज्ञान का आनंद देनेवाला धर्मसंवाद ! हिन्दुओं में धर्मशिक्षा के अभाववश हिन्दू धर्म के सिद्धांत तथा आचारधर्म के विषय में शंका अथवा प्रश्‍न होते हैं । उनका उचित प्रकार से समाधान होना महत्त्वपूर्ण है । हिन्दू धर्म द्वारा प्रतिपादित धर्माचरण केवल परंपरा नहीं, उसका आधारभूत विज्ञान भी है ।‘धर्मसंवाद’ के माध्यम से सर्वसामान्य व्यक्ति के मन में उद्भव होनेवाले प्रश्‍नों के उत्तर देने के साथ ही धर्म के महत्त्वपूर्ण सिद्धांत भी विस्तारपूर्वक समझाए जा रहे हैं । इस धर्मसंवाद के शतकपूर्ती तथा १०० भाग पुरे हुए है ।

इस धर्मसंवाद की अपने आप में कुछ विशेषताएं है । आज जैसे हमें कुछ भी जानकारी चाहिए, वह ‘गुगल’ करना सबसे सरल लगता है । वैसे यह धर्मसंवाद की मालिका एक तरह से धर्म के विषय में ज्ञिज्ञासा रखनेवालोंके लिए ‘गुगल’की तरह थी । आपकी ‘जिज्ञासा’ और ‘व्‍यस्‍तता’ इस के बीच ‘सेतु’ बनने का कार्य ‘धर्मसंवाद’श्रृंखला ने किया । सरलता, सटिकतासे, प्रत्‍यक्ष आचरण योग्‍य जानकारी इस धर्मसंवाद से संतोंके वाणी के द्वारा हमतक पहुंची ।

हमें लगता है की, जब पुरा समाज कोरोना और लॉकडाऊन से चिंतित था और अभी भी है । मानसिक रूप से तणाव में जा रहा है, ऐसे समय में इस धर्मसंवाद का लाभ उठाकर आपमें से अनेकोंके जीवन में अवश्‍य बदलाव आए होंगे । हम तो यह मानते है की, धर्मसंवाद से हमारी एकतरह से विपत्ती में रक्षा ही हुई है । ‘धर्मो रक्षति रक्षित:’ ऐसे जो बताया जाता है, वह यहां प्रमाणित होता है । धर्मग्‍लानी, पाखंड, धर्म के क्षेत्र में चल रहा व्‍यापार इससे ऊब रहे हिन्‍दूआेंको इस धर्मसंवाद से निश्‍चित दिशा मिली है ।

 

सत्संग में धर्म एवं अध्यात्म की सर्वांगीण जानकारी देनेवाले विशेषतापूर्ण विषय

सत्संग संबंधी आए हुए विशेषतापूर्ण अभिप्राय

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