व्रत

महाशिवरात्रि

पृथ्वी एवं देवता इनके कालमान में एक वर्ष का अंतर होता है । शिवजी रात्री एक प्रहर विश्राम करते हैं । उनके इस विश्राम के काल को ‘महाशिवरात्रि’ कहते हैं । महाशिवरात्रि के दिन शिवतत्त्व नित्य की तुलना में १००० गुना अधिक कार्यरत रहता है । शिव तत्त्व का अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने हेतु महाशिवरात्रि के दिन शिव की भावपूर्ण रीति से पूजा-अर्चा करने के साथ ‘ॐ नमः शिवाय ।’ यह नामजप अधिकाधिक करना चाहिए । Read more »

प्रदोष व्रत

प्रत्येक माहकी शुक्ल एवं कृष्ण त्रयोदशीपर सूर्यास्त उपरांतके तीन घटकोंके कालको प्रदोष कहते हैं । ‘प्रदोषो रजनीमुखम् ।’ इस तिथिपर दिनभर उपवास एवं उपासना कर, रातको शिवपूजा उपरांत भोजन करें । Read more »

शिवमुष्टि व्रत

विवाहके उपरांत पहले पांच वर्ष सुहागिनें क्रमसे यह व्रत करती हैं । इसमें श्रावणके प्रत्येक सोमवार एकभुक्त रहकर शिवलिंगकी पूजा करनेकी और चावल, तिल, मूंग, अलसी एवं सत्तू (पांचवा सोमवार आए तो) के धान्यकी पांच मुट्ठी देवतापर चढानेकी विधि है । शिवमुष्टि व्रतविधि शिवजीके देवालयमें जाकर की जाती है । Read more »

श्रावणी सोमवार व्रत

श्रावण मासमें बच्चोंसे लेकर बडे-बूढोंतक सभीके द्वारा किया जानेवाला एक महत्त्वपूर्ण व्रत है, श्रावण सोमवारका व्रत । श्रावण सोमवारके व्रतसंबंधी उपास्य देवता हैं भगवान शिवजी । श्रावण महीनेमें हर सोमवार शंकरजीके मंदिर जाकर उनकी पूजा करें और संभव हो, तो निराहार उपवास रखें अथवा नक्त व्रत रखें । Read more »

श्रावण मासके व्रत

श्रावण मास कहते ही व्रतोंका स्मरण होता है । उपासनामें व्रतोंका महत्त्व अनन्यसाधारण है । सामान्य जनोंके लिए वेदानुसार आचरण करना कठिन है । इस कठिनाईको दूर करनेके लिए पुराणोमें व्रतोंका विधान बताया गया है । Read more »

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