राम मंदिर

‘राममंदिर’ शब्द का उच्चार करते ही हिन्दुआें में चेतना और उत्साह का संचार होने लगता है । ‘राममंदिर’ हिन्दुआें की अस्मिता से जुडा विषय है । १६ वीं शताब्दी में मुसलमान आक्रांता बाबर के सेनापति मीर बांकी ने अयोध्या में राममंदिर तोडकर वहां मसजिद बनवाई । पश्‍चात, हिन्दुआें ने रामजन्मभूमि को मुगलों से मुक्त करने के लिए बहुत लंबी लडाई लडी ! रामजन्मभूमि मुसलमानों से मुक्त हो और वहां भव्य राममंदिर बने’, इसके लिए हिन्दू सैकडों वर्ष से लड रहे हैं । भाजपा के सत्ता में आने पर हिन्दुआें की आशा जगी कि अब राममंदिर अवश्य बनेगा । परंतु, इस विषय में भाजपा सरकार की नकारात्मक भूमिका से हिन्दू निराश हुए हैं । किंतु, संत-महंतों की हुंकार से हिन्दुआें में पुनः आशा का संचार हुआ है । रामजन्मभूमि हिन्दुआें की है, इस ऐतिहासिक सत्य को कोई नकार नहीं सकता । अब हिन्दू समय की पदचाप सुनें और किसी राजनीतिक दल पर आश्रित न रहकर, प्रभावी संगठन बनाएं, तभी राममंदिर बन पाएगा !

राम मंदिर की वार्ता >>

सामाजिक प्रचारमाध्यमों में प्रचारित होनेवाले कुछ लक्ष्यवेधी मार्मिक छायाचित्र !

राममंदिर निर्माण पर हिन्दुआें को केवल आश्‍वासन देनेवाली भाजपा को हिन्दुआें के रोष का सामना करना पडे, तो आश्‍चर्य न होगा ।

राममंदिर के विषय में मिले प्रमाण

 

राममंदिर के विषय में ढेरों प्रमाण उपलब्ध होने पर भी, हिन्दूबहुल भारत में हिन्दुआें को रामजन्मभूमि पर अपना अधिकार नहीं मिल रहा है ! यह अधिकार पाने के लिए हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करनी पडेगी !

सागर पर सेतु बांधनेवाले वानरों के समान भावभक्ति होने पर ही हिन्दुआें को राममंदिर निर्माण के लिए बल मिलेगा !

किसी भी कार्य की सफलता के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा आवश्यक होती है । बडे हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने अबतक अध्यात्म, साधना की उपेक्षा ही की है । इसलिए, आज केवल राममंदिर निर्माण के लिए नहीं, अपितु अन्य अनेक आघातों से भी हिन्दुआें को जूझना पड रहा है ! राममंदिर के लिए वर्षों लडने पर भी यह आंदोलन सफल क्यों नहीं हुआ ?’ इस विषय पर चिंतन करने का समय हिन्दुआें को मिला है । राममंदिर निर्माण का स्वप्न पूरा होने के लिए हिन्दुआें को प्रभु श्रीरामचंद्र की शरण में जाकर उनसे राममंदिर निर्माण के लिए बल मांगना आवश्यक है ! राममंदिर निर्माण के लिए श्रीराम हमें शक्ति और भक्ति प्रदान करें, यह उनसे प्रार्थना है !