बालकों, दूरचित्रवाणी (टीवी) देखनेके दुष्परिणाम समझो !

दूरचित्रवाणी (टीवी) देखनेके दुष्परिणाम

बहुत निकटसे व बहुत देरतक दूरचित्रवाणीके कार्यक्रम देखनेपर आंखोंपर प्रभाव पडता है व सिरमें वेदना होने लगती है । दूरचित्रवाणीके कार्यक्रम देखनेमें मग्न रहेंगे, तो विद्याभ्यास, साधना व अन्य सामाजिक कार्योंके लिए उपयोगी समय व्यर्थ जाता है । दूरचित्रवाणीपर सिनेमा तथा अन्य कार्यक्रमोंमें दिखाई जानेवाली मारपीट, हत्या, चोरी, सिगरेट-मद्यके व्यसन, गालियां देना इत्यादि दृश्य देखकर वैसी कृति करनेकी प्रवृत्ति निर्माण होती है । ऐसे कार्यक्रमोंसे हमारी वृत्ति भी राजसिक-तामसिक बनने लगती है, उदा. हमारा स्वभाव चिडचिडा बनता है, मनकी एकाग्रता कम होती है ।

बच्चों, पाश्चात्य नहीं; अपितु भारतीय संस्कृतिनुसार आचरण करो !

पाश्चात्य सभ्यता (मैनर्स) सिखाती है कि, थालीमें अन्न शेष रखें; अपितु भारतीय सभ्यता सिखाती है, ‘अन्नको भगवानका प्रसाद मानकर उसे थालीमें शेष न रखें, उसे पूर्णत: ग्रहण करें’ ।

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