बालमित्रो, आप अपना दैनिक आचरण सुसंस्कारित करें !

अच्छे संस्कार होने हेतु छोटे बच्चोंके लिए प्रतिदिन निम्नानुसार कुछ प्राथमिक बातें आचरणमें लानी अत्यावश्यक हैं ।

  •     प्रतिदिन उठनेके उपरांत भगवानको नमस्कार करें ।
  •     उठनेके उपरांत प्रात:विधि एवं स्नान कर भगवान, माता-पिता एवं बडोंको नमस्कार करें ।
  •     प्रतिदिन सूर्यनमस्कार करें अथवा आसन एवं व्यायाम करें ।
  •     प्रतिदिन भगवानका छायाचित्र पोछकर, उदबत्ती जलाना अथवा पूजा, स्तोत्र, श्लोक, आरती, नामजप, ध्यान, संध्या-पूजा इत्यादिमें से कुछ न कुछ उपासना, अपनी आयुके अनुसार नियमित करें ।
  •     दूध/चाय पीनेके उपरांत अपना प्याला, नाश्ता अथवा भोजन होनेके उपरांत अपनी थाली एवं कटोरी स्वयं स्वच्छ करें ।
  •     जिन बच्चोंकी आयु दस-बारह वर्षसे अधिक है, वे अपने छोटे कपडे स्वयं धोना प्रारंभ करें ।
  •     बाहरसे लौटनेपर चप्पलें बाहर उतारकर एवं पैर धोकर घरमें प्रवेश करें ।
  •     फल खानेके उपरांत छिलके अथवा चॉकलेटका वेष्टन घरके कूडेदानमें ही डालें ।
  •     भोजनसे पूर्व एवं भोजनके उपरांत हाथ धोएं ।
  •     रातके भोजनके उपरांत दांत ब्रशसे स्वच्छ करें ।
  •     पढाईकी सभी सामग्री, खिलौने, कहानीकी पुस्तके तथा अन्य सभी वस्तुएं निर्धारित स्थानपर रखें ।
  •     भित्तिका (दीवार)पर रेखाएं खींचना, गद्दोंपर गंदे पैर चढना जैसे अनुशासनहीन आचरण न करें ।
  •     पाठशाला, पढाई, व्यायाम, साधना, अपनी व्यक्तिगत वस्तुएं समेटना, खेलना, पढाई करना, घरके काम-काजमें सहायता करना, मनोरंजन आदि सभी बातोंकी समयसारिणी बनाकर नियोजन करें ।
  •     झाडू लगाना, स्वच्छता करना अथवा रसोईघरके छोटे-छोटे कार्य करना, बाहरसे कोई वस्तु यदि लानी हो तो वह लाना इत्यादि कामोंमें स्वयं ही समयके अनुसार सहायता करें ।
  •     कुछ खाते समय यदि कोई व्यक्ति सामने आ जाए, तो पहले उसे दें ।
  •     जो वस्तुएं दूसरोंके पास हैं, हमारे पास नहीं हैं; परंतु अभी हमें उनकी आवश्यकता भी नहीं है, तो उनकी मांग न करें ।
  •     सतत विनम्रतासे बोलें एवं आचरण करें । ऊंची आवाजमें एवं अनावश्यक बोलना टालें ।
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