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कागल (जनपद कोल्हापुर) में शिवाजी महाराजके छायाचित्रवाले फलकका अनादर

वैशाख शुक्ल २ , कलियुग वर्ष ५११५

हिंदुओ, हमारे राष्ट्रपुरुषोंके अनादर कभी भी न हों, इसलिए हिंदू राष्ट्रकी स्थापना करें !

तीनोंको बंदी, कागल तथा हुपरी बंद, इचलकरंजीमें प्रदर्शन 

 


कागल (जनपद कोल्हापुर) : यहांके खर्डेकर चौकपर श्रीरामभक्त हनुमान मंदिरके पास आशाभाऊ गुटकी (ग्रुपकी) ओरसे शिवजयंतीके अवसरपर छत्रपति शिवाजी महाराजका भव्य फ्लेक्स फलक प्रदर्शित किया गया था । ९ मईकी रात्रि १०.४५ बजे एक धर्मांधों तथा अन्य तीन जनोंद्वारा इस फलकका अनादर किया गया । (छत्रपति शिवाजी महाराजके महाराष्ट्रमें वैचारिक दृष्टिसे धर्मांधों बने राजनेता सत्तामें हैं । अतः धर्मांधोंके नेतृत्वमें इस प्रकारके अनादर  हो रही हैं ! इस स्थितिमें परिवर्तन लाने हेतु हिंदू राष्ट्र चाहिए ! - संपादक, दैनिक सनातन प्रभात ) अतः प्रक्षुब्ध हिंदुनिष्ठोंद्वारा ३ हिंदुद्वेषियोंकी पिटाई की गई तथा उन्हें पुलिसके अधीन किया गया । एक धर्मद्रोहीके अल्पवय होनेके कारण पुलिसने उसे छोड दिया । (धर्मद्रोहीके अल्पवय होनेपर भी उसका हिंदुद्वेष देखकर पुलिसको उसपर कठोर कार्यवाही करनी ही चाहिए । इस प्रकारके अपराधियोंको खुले छोडनेके कारण भविष्यमें वे भारी मात्रामें हिंदुद्रोह करते हैं ! - संपादक, दैनिक सनातन प्रभात)

इस घटनाके निषेधार्थ १० मईके दिन कागल तथा हुपरी (जनपद कोल्हापुर) में बंदका पालन किया गया । साथ ही इचलकरंजीमें हिंदुनिष्ठोंद्वारा प्रदर्शन किया गया । इस घटनाके कारण कागलमें तनावका वातावरण उत्पन्न हुआ है ।

१. खर्डेकर चौकपर एक बिजलीके खंभेपर भूमिसे २ फीटकी ऊंचाईपर छत्रपति शिवाजी महाराजके छायाचित्रवाला भव्य फ्लेक्स फलक प्रदर्शित किया गया है ।

२. ९ मईकी रात्रि सरफरोज हुसेन (आयु २० वर्ष, नए हाइस्कूलका निवासी ), वैभव दिनकर हेगडे (आयु २० वर्ष, दावणे वसाहतका निवासी ), अमोल आवळे (नए घरकुलके सामने, बेघर वसाहतका निवासी ) तथा अन्य एक थे । इन सभीने मद्यप्राशन किया था ।

३. मद्यकी नशामें उन्होंने फलकपर लातोंसे प्रहार किया । फलकके सामने मद्यकी बोतलें तोड डाली । फलकपर दारू डालनेका प्रयास किया । (इन घटनाओंद्वारा समाजकंटकोंका हिंदुद्वेष ही स्पष्ट होता है । इससे यह दिखाई देता है कि जन्मसे हिंदू होकर भी हिंदुद्वेषियोंके साथ संलिप्त व्यक्तियोंका अधःपतन ही होता है । साथ ही इस बातसे यह भी स्पष्ट होता है कि देशकी मूल धाराके साथ बहनेकी जिनकी इच्छा नहीं है, अपने बच्चे उन व्यक्तियोंका साथ  न दें, इसलिए हिंदू पालक सतर्क रहें ! - संपादक, दैनिक सनातन प्रभात)

४. यह घटना उस पथसे अग्रसर होनेवाली कुछ महिलाएं तथा शिवप्रेमियोने देखी । शिवप्रेमी एवं हणभर गली संयुक्त मित्र मंडलके अध्यक्ष सर्वश्री गौरव नाईक, कार्यकर्ता अमित नाईक, सुहास गुरव, सौरभ पाटिल, सागर भुरले, उत्तम खोत, सुमित माने, राहुल माने, अर्जुन नाईक आदिद्वारा सभी समाजकंटकोंको पकडकर फटकारा गया ।

५. उस समय हुसेन, हेगडे तथा आवले उद्धंडतासे चिल्ला-चिल्लाकर कहने लगे कि हम किसीसे नहीं डरते । आपको जो करना है, वह करें ।

६. इसलिए हिंदुनिष्ठोंने उनकी पिटाई की ।

७. इस घटनाकी सूचना प्राप्त होते ही, घटनास्थलपर आई पुलिसने उन तीनोंको अधिकारमें लिया । पुलिसकी ओरसे प्रारंभमें उनपर अपराध प्रविष्ट करनेके लिए टालमटोल की गई । (आरोपी मुसलमान होनेके कारण ही पुलिस अपराध प्रविष्ट करनेके लिए टालमटोल करती है, यह बात कहनेकी आवश्यकता  नहीं ! इसी स्थानपर महम्मद पैंगबर अथवा येशु क्रिस्तका अनादर किया जाता, तो पुलिस स्वयं उनके विरोधमें अपराध प्रविष्ट करती तथा संबंधित व्यक्तियोंको ढूंढती  । इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि पुलिस संगठन तथा विध्वंसक भाषा ही जानती एवं समझती है । यदि इस प्रकारकी धारणा हिंदुओंकी हुई, तो उसमें अयोग्य क्या है ? - संपादक, दैनिक सनातन प्रभात)

८. अतः  पुलिस थानेके सामने भारी संख्यामें संतप्त हिंदुनिष्ठ इकट्ठे होने लगे । उन्होंने संबंधित व्यक्तियोंपर अपराध प्रविष्ट करनेकी मांग की ।

९. तत्पश्चात पुलिसने तीनोंपर भारतीय दंड विधान संहिता धारा १५१ के अनुसार कार्रवाई करनेका ढोंग रचाया ।

१०. इस घटनाके निषेधार्थ १० मईको कागल बंदका आवाहन किया गया था । उस आशयका फलक भी नगरपरिषदके सामने लगाया गया था । इसलिए बंदको लोगोंद्वारा अच्छा प्रतिसाद प्राप्त हुआ । दोपहर २ बजेके पश्चात राज्य परिवहन मंडलकी बसका आवागमन आरंभ हुआ ।


११. सुबह १० बजे शिवसेनाके जनपदप्रमुख श्री. विजय देवणेद्वारा ५०० हिंदुनिष्ठोंके साथ पुलिस थानेपर मोर्चा निकाला गया । साथ ही श्री. देवणेद्वारा पुलिस थानेमें इन समाजकंटकोंके विरोधमें अभियोग प्रविष्ट किया गया ।

१२. पुलिस उपाधीक्षक महेश सावंतने श्री.देवणेको बताया कि नगरमें फलक प्रदर्शित किए जाते हैं, किंतु कोई उनकी सुरक्षाका दायित्व अपने ऊपर नहीं लेता । पुलिसकी संख्या मर्यादित होनेके कारण फलक प्रदर्शित करनेवाले ही इस विषयमें विचार करें । (अपना दायित्व झटकनेवाले पुलिस उपाधीक्षक ! क्या अहिंदुओंके त्योहारोंके संदर्भमें भी पुलिस उपाधीक्षक इस प्रकारके नियमका  पालन करते ? फलककी रक्षा करनेमें असमर्थ पुलिस जनताकी रक्षा क्या करेगी ? - संपादक, दैनिक सनातन प्रभात)

१३.श्री. देवणेने बताया कि यह अपकृत्य कर जातीय अनबन उत्पन्न की जा रही है । हिंदुओंकी धार्मिक भावना आहत की जा रही है । अतः सर्व आरोपियोंको सीमापार करें !

१४. तत्पश्चात पुलिसद्वारा समाजकंटकोंपर भारतीय दंड विधान धारा २९५(अ) तथा ३४ के अनुसार अपराध प्रविष्ट कर उन्हें बंदी बनाया गया । (हिंदुओ यह ध्यानमें रखें कि आपके संगठित होकर शक्तिप्रदर्शन करनेके पश्चात ही पुलिसको उनके कर्तव्यका भान होता है !-संपादक, दैनिक सनातन प्रभात )

पुलिसपर दबाव डालनेका प्रयास !

मईकी रात्रि हिंदुनिष्ठोंद्वारा धर्मद्रोहियोंको पकडनेके पश्चात उनपर अपराध प्रविष्ट करनेकी मांग की गई; किंतु उसी समय उपस्थित पुलिस उपनिरीक्षक शेवाळेको किसीका भ्रमणभाष आया । उसपर उन्हें इस प्रकार बताया गया कि यह कृत्य मद्यकी नशेमें किए जानेके कारण उसे समाप्त करें(संबंधित व्यक्तिद्वारा दबाव डाला गया । ऐसा होते हुए भी, दबाव लेनेवाली पुलिसको इस बातका भान नहीं कि योग्य क्या तथा अयोग्य क्या है- संपादक, दैनिक सनातन प्रभात )हिंदुनिष्ठोंद्वारा यह मांग भी की गई कि संबंधित दबाव डालनेवालेको ढूंढकर उसपर भी अपराध प्रविष्ट करें । 

दो ट्रक तथा बसगाडियोंपर पथराव !

१० मईको दोपहर १२ बजे कुछ हिंदुनिष्ठोंद्वारा इस घटनाके निषेधार्थ पुणे-बंगलुरू मार्गपर वाहन रोके गएउनमेंसे दो ट्रक तथा एक बसपर पथराव कर वाहनकी कांच तोड दी गईपुलिसने सौम्यरूपमें लाठीसे मारपीट कर जमावको बिखेर दिया

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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